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ट्रंप के समर्थकों ने भी छोड़ा साथ! मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के 5 बड़े कारण

वाशिंगटन
अमेरिका में हो रहे मिडटर्म चुनाव के रिजल्ट पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं, पर अमेरिका के वोटर्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी इस चुनाव में करारी हार के करीब पहुंच गई है। विपक्षी डेमोक्रेट्स को अमेरिकी सीनेट में बहुमत मिल गया है। डेमोक्रेट्स ने 50 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है, जो ट्रंप के लिए बहुत बड़ी हार है। ट्रंप ने आखिरकार अपनी हार मान ली है और कहा है कि हम डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेंगे।

टेक्सास, साउथ कैरोलिना, ओहायो और कंसास जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ों में सेंध लगा दी। डेमोक्रेट्स ने ऐसी कई सीटों पर जीत हासिल की, जहां दशकों से उनकी पहुंच नहीं थी। इसके साथ ही कई राज्यों में नए इतिहास भी बनाए। सबसे हैरान करने वाली बात उन इलाकों में डेमोक्रेट्स की बढ़त रही, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी आसानी से जीत हासिल की थी। इससे संकेत मिल रहे हैं कि जिन वोटर्स के समर्थन से ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बने थे, अब उनमें उनका समर्थन कम होने लगा है।

डेमोक्रेटिक पार्टी के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट, दोनों पर अच्छा खासा कंट्रोल होने जा रहा है । मिड टर्म चुनाव के नतीजों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि डेमोक्रेट्स की इस बड़ी वापसी के पीछे आखिर क्या वजह रही? क्या इसकी वजह ट्रंप की नीतियों का अर्थव्यवस्था पर पड़ता असर है, ईरान के साथ जंग या फिर खुद राष्ट्रपति ट्रंप से वोटर्स की बढ़ती नाराजगी?

महंगाई, टैरिफ और ईरान वॉर बने चुनाव के बड़े मुद्दे
चुनाव में अर्थव्यवस्था सबसे अहम मुद्दों में से एक बनकर सामने आई। महंगाई और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों ने वोटर्स की चिंता बढ़ाई। इसके अलावा, ट्रंप सरकार की टैरिफ से जुड़ी नीतियों और ईरान के साथ युद्ध का मुद्दा भी वोटर्स के फैसले पर असर डालता नजर आया। डोनाल्ड ट्रंप 2024 में महंगाई कम करने और लोगों का जीवन बेहतर बनाने का वादा करके दोबारा राष्ट्रपति बने थे। लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई, विदेशी सामान पर लगाए गए टैरिफ और ईरान के साथ जंग के आर्थिक असर ने उनके इस वादे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिकी मीडिया संस्थानों के एक समूह के लिए एसएसआरएस की ओर से किए गए एग्जिट पोल के मुताबिक, हर 10 में से करीब 9 वोटर्स ने कहा कि वोट देते समय रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें और घर चलाने का खर्च उनके लिए अहम मुद्दा था। इससे साफ पता चलता है कि महंगाई और बढ़ते खर्च ने चुनाव में वोटर्स के फैसले को काफी हद तक प्रभावित किया। करीब दो-तिहाई वोटर्स ने बढ़ती महंगाई के लिए डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, हर 10 में से लगभग 6 लोगों का मानना था कि ट्रंप की नीतियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को और खराब कर दिया है।

वोटर्स की नाराजगी सिर्फ महंगाई और घरेलू खर्च तक सीमित नहीं थी। करीब तीन-चौथाई लोगों ने कहा कि वे देश की मौजूदा स्थिति और उसके भविष्य की दिशा से खुश नहीं हैं। इसके अलावा, सरकारी भ्रष्टाचार और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यवहार को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली। ईरान के साथ जंग ने भी लोगों की नाराजगी बढ़ाने का काम किया। एक तरफ आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा था, तो दूसरी तरफ वे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे थे।

सीएनएन के वोटर पोल के मुताबिक, हर 10 में से 6 से ज्यादा मतदाता ट्रंप के कामकाज से नाखुश थे। इनमें से ज्यादातर लोगों ने उनके प्रदर्शन को पूरी तरह खराब बताया। वहीं, एसोसिएटेड प्रेस के वोटर पोल में करीब 10 में से 6 मतदाताओं का मानना था कि ट्रंप देश के हितों से ज्यादा अपने निजी फायदे को प्राथमिकता दे रहे हैं।

टेक्सास से साउथ कैरोलिना तक: डेमोक्रेट्स की जीत
डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत सिर्फ उन राज्यों तक सीमित नहीं रही, जहां पहले से कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद थी। पार्टी ने रिपब्लिकन के मजबूत गढ़ माने जाने वाले राज्यों में भी बड़ी जीत हासिल की। इससे अमेरिका की राजनीति में आए बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। टेक्सास में जेम्स टैलारिको की जीत ने इतिहास रच दिया। पिछले 38 साल में पहली बार राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट चुनाव में जीत मिली।

वहीं, साउथ कैरोलिना में एनी एंड्रयूज ने डोनाल्ड ट्रंप की पसंदीदा उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम को हरा दिया। इस जीत के साथ डेमोक्रेट्स ने उस राज्य में सीनेट की सीट हासिल की, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने 18 फीसदी अंकों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। ओहायो में भी डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी सफलता मिली। यहां शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे वाली सीनेट सीट वापस जीत ली। इसके अलावा, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने गवर्नर का चुनाव भी जीत लिया।

कंसास में भी डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी कामयाबी मिली। यहां एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सांसद रोजर मार्शल को हरा दिया। इस जीत के साथ कंसास में 1932 से चला आ रहा डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेट में जीत का इंतजार खत्म हो गया। इन चुनावों में कई ऐतिहासिक नतीजे भी देखने को मिले। जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स अमेरिका के इतिहास में गवर्नर बनने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं। वहीं, न्यू मैक्सिको में डेब हैलैंड ने जीत दर्ज कर पहली मूल अमेरिकी महिला गवर्नर बनने का इतिहास रचा। इसके अलावा, न्यू हैम्पशायर के क्रिस पैपस अमेरिका के पहले ऐसे समलैंगिक पुरुष बने, जो सीनेटर चुने गए।

हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी की इस बड़ी जीत के बावजूद उसके सामने कई चुनौतियां बनी रहेंगी। इसकी बड़ी वजह राष्ट्रपति ट्रंप के पास मौजूद वीटो का अधिकार और सीनेट में ज्यादातर कानूनों को पास कराने के लिए जरूरी 60 वोटों की शर्त है। ऐसे में डेमोक्रेट्स के लिए अपने पूरे एजेंडे को लागू करना मुश्किल हो सकता है।

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