मध्य प्रदेश

तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों की शिक्षा को संबल दे रही एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति योजना

इस सत्र में 2,216 विद्यार्थियों को मिली छात्रवृत्ति

भोपाल
मध्यप्रदेश के जनजातीय एवं वनांचल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के पात्र बच्चों को शिक्षा जारी रखने और उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। वर्ष 2025-26 में योजना के अंतर्गत कुल 2,216 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई। इनमें 1,180 छात्र और 1,036 छात्राएं शामिल हैं। इस दौरान छात्रवृत्ति के लिए 277.16 लाख रुपये (लगभग 2.77 करोड़ रुपये) वितरित किए गए। यानी प्रत्येक 100 लाभार्थियों में लगभग 47 छात्राएं हैं।

वर्ष 2026-27 में योजना का दायरा बढ़ाने की दिशा में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि की जाएगी। इसके लिए छात्रवृत्ति का लक्ष्य 5 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत (222.84 लाख रुपये) अधिक है।

कक्षा 9वीं से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति
योजना के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक तथा महाविद्यालयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार छात्रवृत्ति दी जाती है। पात्रता के लिए पिछले पांच वर्षों में कम से कम तीन वर्षों तक प्रत्येक वर्ष एक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण की शर्त तथा विद्यार्थियों के अंकों से संबंधित निर्धारित मानदंड लागू हैं।

शिक्षण सत्र 2022-23 से लागू दरों के अनुसार, कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों को अधिकतम 15 हजार रुपये, कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को अधिकतम 18 हजार रुपये, गैर-तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को अधिकतम 25 हजार रुपये तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को अधिकतम 60 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है। वास्तविक सहायता योजना की पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुसार प्रदान की जाती है।

शहडोल संभाग के विद्यार्थियों के लिए भी सहायता
विभागीय जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 में शहडोल जिले के 130 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति वितरण के लिए 18 लाख 35 हजार रुपये आवंटित किए गए। इसी अवधि में उत्तर एवं दक्षिण शहडोल सहित उमरिया, अनूपपुर, सतना और सीधी के छह वनमंडलों के 362 छात्र-छात्राओं के लिए कुल 25 लाख 27 हजार रुपये आवंटित किए गए।

आजीविका के साथ शिक्षा को भी प्रोत्साहन
तेंदूपत्ता संग्रहण से प्राप्त पारिश्रमिक ग्रामीण परिवारों की दैनिक आवश्यकताओं और बच्चों की पढ़ाई पर होने वाले खर्चों को पूरा करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, नियमानुसार बोनस तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, चौपाल, प्रतीक्षालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए सहायता भी ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देती है।

एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति योजना वन आधारित आजीविका से जुड़े परिवारों के पात्र विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग देकर उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद करती है। पात्र विद्यार्थियों को योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है, ताकि वे समय पर आवेदन कर इसका लाभ प्राप्त कर सकें।

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