राजनीतिक

ममता बनर्जी का नया गठबंधन प्लान? कांग्रेस से दूरी और अलग मोर्चे की अटकलें तेज

नई दिल्ली

2029 लोकसभा चुनाव से पहले भारत की राजनीति में बड़ी हलचल होने के आसार हैं। इसके संकेत हाल ही में हुईं कुछ बैठकों से मिल रहे हैं। DMK यानी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम सांसद कनिमोई ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की है। खबरें हैं कि बगैर कांग्रेस के और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक क्षेत्रीय दलों का गठबंधन तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इसे लेकर औपचारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

कनिमोई और बनर्जी ने गुरुवार को कोलकाता में मुलाकात की। हालांकि, कालीघाट स्थित पूर्व सीएम के आवास पर हुई बैठक में किन मुद्दों पर बात की गई, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। इससे पहले डीएमके नेता शिवसेना यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी से लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले से मिली थीं। कहा जा रहा है कि वह जल्द ही आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मिल सकती हैं।

तीसरे मोर्चे की तैयारी
 डीएमके के एक नेता ने कहा, 'हम बगैर कांग्रेस के एक तीसरे मोर्चे की संभावनाएं तलाश रहे हैं।' इधर, अखबार से बातचीत में एक टीएमसी सांसद ने कहा, 'ममता बनर्जी के DMK प्रमुख एमके स्टालिन के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। वह गैर NDA पार्टियों के साथ भी अच्छे रिश्ते बनाए रखती हैं और INDIA ब्लॉक के उन सदस्यों के करीब हैं जो कांग्रेस समर्थक नहीं हैं। आज की बातचीत सिर्फ उनके और कनिमोई के बीच हुई। इसके अलावा कुछ भी कहना सिर्फ अटकलें लगाना होगा।'

DMK तो है क्या ममता बनर्जी भी कांग्रेस से नाराज?
तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक कांग्रेस और डीएमके एक साथ रहे। विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ लड़े, लेकिन 2026 चुनाव के बाद स्थिति बदल गई। कांग्रेस राज्य के सबसे बड़े दल तमिलागा वेत्री कझगम से जा मिली और पुराने साथी डीएमके के छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि डीएमके ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और INDIA गठबंधन से भी दूरी बना ली।

वहीं, ममता बनर्जी की नाराजगी की एक वजह सीट शेयरिंग हो सकती है। खबरें थीं कि पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर ममता ने कांग्रेस से मदद मांगी थी, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। हालांकि, टीएमसी नेता इससे इनकार कर रहे हैं। जबकि, कांग्रेस खुलकर इसे स्वीकार कर रही है। खबरें थीं कि पूर्व सीएम ने कांग्रेस से रेजिनगर सीट पर समर्थन मांगा था और नंदीग्राम सीट छोड़ने की पेशकश की थी।

कांग्रेस के पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रदीप भट्टाचार्य ने पीटीआई को बताया था, 'प्रस्ताव यह था कि तृणमूल कांग्रेस रेजीनगर से चुनाव लड़ेगी और नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ देगी। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर समय मांगा और बाद में प्रदेश के नेताओं से इस प्रस्ताव पर चर्चा की।' उन्होंने कहा, 'प्रदेश नेतृत्व का मानना था कि गठबंधन के लिए यह सही समय नहीं है। उचित समय आने पर इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन अभी नहीं। यह सही फैसला है।'

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने कहा, 'जब तृणमूल सत्ता में थी, तब उसने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया था, जब भाजपा के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना थी। अब जब वह अकेली और पराजित है, तो ऐसा लगता है कि उसे कांग्रेस के महत्व का एहसास हुआ है।'

गठबंधन की पहले भी हुईं हैं कोशिशें
साल 2013 में ममता बनर्जी ने कोशिशें की थीं कि बगैर कांग्रेस और भाजपा के गठबंधन तैयार किया जा सके। इसके बाद 2018 में तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी अलग-अलग राज्यों का दौरा करते नजर आए। 2024 से पहले केजरीवाल भी गठबंधन को कोशिश कर रहे थे।

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