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पदक बढ़ाने का लक्ष्य तो ओलंपिक के आधे खेलों में उतरना होगा, पीएम मोदी ने उठाया बड़ा सवाल

 नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के ओलंपिक अभियान को लेकर गुरुवार को बड़ा सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर देश को ओलंपिक में अपना पदक प्रदर्शन बेहतर करना है, तो उन खेलों में भी उतरना होगा, जिनमें भारत अब तक भाग नहीं लेता रहा है. उन्होंने कहा कि ओलंपिक के आधे खेलों में भारत की मौजूदगी ही नहीं है और ऐसे में पदक तालिका का बड़ा हिस्सा अपने आप ही हमारे लिए बाहर हो जाता है। 

‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में देशभर के खिलाड़ियों, छात्रों और स्वयंसेवकों को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों को सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं किया जा सकता. खेलों के जरिए देश की युवा शक्ति और खेल शक्ति को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ना उनकी सोच का हिस्सा है. इस कार्यक्रम में खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी शामिल हुए। 

‘ओलंपिक में आधे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेते’
पीएम मोदी ने कहा, 'ओलंपिक में इतने सारे अलग-अलग खेल होते हैं… भारतीय टीमें उनमें से आधे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेतीं. इसका मतलब है कि हम पदकों की बड़ी संख्या के लिए मुकाबला ही नहीं कर रहे हैं। 

उन्होंने इसे देश के लिए एक कड़वी सच्चाई बताते हुए कहा कि यह स्थिति दशकों से चली आ रही है. मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत ने सिर्फ 13 खेलों में हिस्सा लिया था. यानी 20 से ज्यादा खेलों में भारत की मौजूदगी नहीं थी। 

उन्होंने कहा कि दूसरे देश उन खेलों में पदक जीत रहे हैं, जबकि भारत वहां प्रतियोगिता में ही शामिल नहीं हो रहा. ऐसे में पदक तालिका में सुधार के लिए इन खेलों में भी अपनी क्षमता विकसित करनी होगी। 

2024 पेरिस में 32 में से 16 खेलों में भारत
पीएम मोदी की बात का आंकड़ों से भी सीधा संबंध है. 2024 पेरिस ओलंपिक में कुल 32 खेल शामिल थे, लेकिन भारत ने इनमें से सिर्फ 16 खेलों में हिस्सा लिया था. यानी आधे खेलों में भारतीय खिलाड़ी मैदान पर नहीं उतरे। 

मोदी ने इसी अंतर को भारत के लिए नए अवसर के तौर पर देखने की बात कही. उनका मानना है कि सिर्फ उन खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने से काम नहीं चलेगा, जिनमें भारत पहले से मजबूत है. पदक जीतने का दायरा बढ़ाने के लिए नए खेलों में भी खिलाड़ियों को तैयार करना होगा। 

सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग पर खास जोर
प्रधानमंत्री ने सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में इन खेलों के लिए प्राकृतिक परिस्थितियां मौजूद हैं, लेकिन अभी तक कोई भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक में इन स्पर्धाओं में नहीं उतरा है। 

उन्होंने कहा कि भारत की विशाल समुद्री तटरेखा सर्फिंग के लिए और देश का विशाल पहाड़ी क्षेत्र स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियों के लिए अनुकूल है. इसके बावजूद इन खेलों में भारत की वैश्विक मौजूदगी नजर नहीं आती। 

सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग दोनों को 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के कार्यक्रम में जगह मिली है. मोदी ने कहा कि भारत को अलग-अलग क्षेत्रों में इन खेलों के विकास के अवसर तलाशने होंगे और इन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी। 

उन्होंने कहा, 'पानी के खेलों से लेकर विंटर स्पोर्ट्स तक, हमारे पास जरूरी जनसांख्यिकी और भौगोलिक परिस्थितियां मौजूद हैं। 

5 से 15 साल के बच्चों की होगी तलाश
प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में देश के खेल भविष्य को लेकर एक राष्ट्रव्यापी टैलेंट हंट का ऐलान किया था. इसके तहत 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों की प्रतिभा पहचानने पर जोर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में ओलंपिक में भारत की भागीदारी और मजबूत हो सके। 

खेलों के अपने विजन को समझाते हुए मोदी ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ पदक जीतना नहीं है. खेलों को देश की युवा शक्ति के साथ जोड़कर विकसित भारत के निर्माण का माध्यम बनाना है। 

‘खेल सिर्फ चैम्पियन नहीं, बेहतर इंसान बनाता है’
पीएम मोदी ने खेलों की भूमिका को पदकों से आगे बताते हुए कहा कि खेल युवाओं में चरित्र निर्माण का काम करते हैं. उनके मुताबिक खेल जीतने के साथ-साथ हार के बाद फिर उठ खड़े होने की भावना भी सिखाते हैं। 

उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को नशे जैसी गंभीर चुनौती से दूर रखने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। 

मोदी ने युवाओं को स्क्रीन और गेमिंग की दुनिया से बाहर निकलकर मैदान और खेल केंद्रों से जुड़ने का संदेश भी दिया. उन्होंने कहा, 'स्क्रीन से ज्यादा स्पोर्ट्स सेंटर की अहमियत है. प्ले स्टेशन से ज्यादा प्लेग्राउंड की अहमियत है। 

मेजर ध्यानचंद को किया याद
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय खेल दिवस से पहले हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को भी याद किया. 29 अगस्त को ध्यानचंद की जयंती के मौके पर देश में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। 

मोदी ने कहा कि करीब 100 साल पहले भारतीय हॉकी टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर गई थी और उस टीम में ध्यानचंद भी शामिल थे. उन्होंने इस दौरे को भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की शताब्दी की नींव बताया। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान भी उन्होंने मेजर ध्यानचंद को याद किया था। 

पैरा एथलीटों से प्रेरणा लेने की अपील
पीएम मोदी ने पैरा एथलीटों को खेल की ताकत का बड़ा उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी की सफलता सिर्फ उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उससे परिवार, स्कूल, कॉलेज, जिले और पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ता है। 

उन्होंने पैरा-आर्चर शीतल देवी, पैरा-शूटर अवनी लेखरा, पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार और पैरा-जैवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल का विशेष रूप से जिक्र किया। 

मोदी ने कहा कि इन खिलाड़ियों ने दिखाया है कि खेल किसी व्यक्ति की जिंदगी के साथ-साथ उसके आसपास के पूरे समाज को बदलने की क्षमता रखता है। 

प्रधानमंत्री का संदेश साफ है- अगर भारत को ओलंपिक पदक तालिका में बड़ा बदलाव लाना है, तो सिर्फ मौजूदा मजबूत खेलों पर निर्भर रहने के बजाय नए खेलों में भी खिलाड़ियों की फौज तैयार करनी होगी। 

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