मध्य प्रदेश

उज्जैन में 11वीं सदी के शिव मंदिर का होगा पुनर्निर्माण, राजा भोज के ‘समरांगणसूत्रधार’ से लिया वास्तु आधार

उज्जैन 
 उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में 11वीं सदी में बने शिव मंदिर के ढह जाने के बाद उसी शैली, ऊंचाई में पुनर्निर्माण के लिए परमार वंश के राजा भोज द्वारा लिखा वास्तुकला का ग्रंथ 'समरांगणसूत्रधार' काम आया है। यह मंदिर परमार कला की भूमिज शैली में बना था।

2020 में हुई खोदाई में दिखा था शिव मंदिर
वर्ष 2020 में महाकाल मंदिर परिसर में विस्तार कार्य के दौरान खोदाई में यह शिव मंदिर दिखा था। इसके बाद मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग ने 2021 से यहां अपने संरक्षण में खोदाई कराई। फिर उसी स्थान पर उसी शैली, लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का मंदिर बनाया जा रहा है। यह पुरातत्व विभाग की नीति भी है कि मंदिरों को उसी स्वरूप में बनाया जाए।

वेदिबंध के आधार पर ऊंचाई का आकलन
चुनौती यही थी कि कैसे पता चले कि मंदिर कितना ऊंचा या लंबा-चौड़ा था। इस पर समरांगणसूत्रधार में उल्लेखित वास्तु का वह फॉर्मूला काम आया, जिसमें बताया गया है भुजाओं के आधार पर ऊंचाई व अन्य संरचना का आकलन किया जा सकता है। मंदिर की वेदिबंध (नींव के ऊपर बना हुआ निचला वास्तु-भाग) के आधार पर ऊंचाई का आकलन 37 फीट किया गया। जिसका निर्माण कार्य चल रहा है।

राजस्थान के पत्थरों से हो रहा निर्माण
निर्माण एक वर्ष में पूरा होने की आशा है। मंदिर के अवशेष से पता चला इसे बेसाल्ट चट्टानों से बनाया गया था। इसलिए राजस्थान से ये चट्टानें मंगवाकर लगाई जा रही हैं। अभी वेदिबंध तक का काम हो गया है, अब जंघा और शिखर का काम होना है। राजस्थान के कारीगरों की टीम इसे बना रही है।

20 फीट गहराई में मिले थे अवशेष
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जमीन से करीब 20 फीट की गहराई पर प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले थे। इसमें मंदिर का आधार भाग, गर्भगृह के अवशेष, नंदी, गणेश, मां चामुंडा, शार्दूल सहित कई महत्वपूर्ण प्रतिमाएं और स्थापत्य खंड मिले थे, पर शिवलिंग नहीं था। साथ ही भारवाही कीचक, कपोतिका, कुंभ भाग, स्तंभ, आमलक आदि स्थापत्य अवशेष भी मिले थे।

वास्तुपुरुष मंडल पर आधारित है मंदिर की योजना
मंदिर की वास्तु योजना वास्तुपुरुष मंडल पर आधारित बताई गई है। पुनर्निर्माण में पुराने पत्थरों या खंडों का उपयोग, आवश्यकता के अनुसार तांबा या स्टेनलेस स्टील क्लैंप और चूना आदि का उपयोग किया जाएगा। अभी वेदिबंध तक निर्माण कार्य हुआ है। एक वर्ष में मंदिर तैयार हो जाएगा। निर्माण के बाद इसे मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया जाएगा।

समरांगणसूत्रधार में है लेआउट का पैमाना
मप्र पुरातत्व विभाग के पुरातत्वविद् डा. रमेश यादव बताते हैं कि समरांगणसूत्रधार वास्तु का एक ग्रंथ है, जिसमें सूत्र दिए गए हैं। उसमें पैमाना दिया गया है। यदि ले आउट पता चल जाता है तो उसके अनुसार अन्य भाग की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई पता की जा सकती है। इसमें पैमाना दिया गया है कि कुंभ भाग कितना होने पर शिखर और जंघा का भाग कितना होगा। हमें वेदिबंध का हिस्सा मिला था। इसी आधार पर ऊंचाई का आकलन 37 फीट किया गया है।

    महाकाल मंदिर परिसर में शिव मंदिर का निर्माण उसके पुराने स्वरूप में किया जा रहा है। इसमें नीचे की हिस्से का काम हो गया है। मंदिर के निर्माण के पहले उसकी शैली, आकार आदि पर गहराई से शोध किया गया है, ताकि उसे वही पुराना स्वरूप दिया जा सके। –    मदन कुमार नागरगोजे, आयुक्त, पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार

    राजाभोज संस्कृत के विद्वान थे। उन्होंने 80 से अधिक ग्रंथ लिखे थे, जिनमें ज्योतिष, वास्तु, यंत्र निर्माण, व्याकरण आदि के ग्रंथ हैं। समरांगणसूत्रधार में 83 अध्यायों में सात हजार से अधिक श्लोक हैं। इनमें नगर नियोजन, शिल्पशास्त्र, मंदिर निर्माण, प्रासाद निर्माण आदि के बारे में बताया गया है।–     – डॉ. नीलेश व्यास, रोज भोज के ग्रंथों पर शोध करने वाले

 

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