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बलूचिस्तान में BLA का तांडव तेज, पाकिस्तानी सेना के कथित मुखबिरों पर हमले से बढ़ी चिंता

बलूचिस्तान 
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने बलूचिस्तान प्रांत को अब किस तरह से अपने कब्जे में कर लिया है, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि BLA सीधे-सीधे कह रही है कि वो पाकिस्तानी हूकूमत के मुखबरिों को नहीं छोड़ेगी. हाल ही में इस संगठन ने क्वेटा में एक व्यक्ति की हत्या की जिम्मेदारी ली है. उनकी ओर से इसकी वजह बताते हुए कहा गया है कि मारे गए व्यक्ति का नाम फारूक मोहम्मद हसनी था और उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के साथ काम करने की वजह से मारा गया है। 

सूत्रों के मुताबिक ये घटना क्वेटा के सरयाब मिल इलाके में हुई. BLA का कहना है कि मारे गए फारूक मोहम्मद शख्स हसनी को खुफिया एजेंसियों से जुड़े एक समूह का सदस्य माना जाता था. संगठन ने आरोप लगाया कि वह बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया कार्रवाइयों में मदद करता था. BLA की खुफिया ब्रांच ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी हुई थी और जैसे ही वो मंगुचर से क्वेटा आया, उसे विद्रोही संगठन ने मौत के घाट उतार दिया। 

BLA  का ‘हंट एंड किल’ अभियान तेज 
BLA  ने इसे ‘ऑपरेशन गोबात’ और नए ‘हंट एंड किल’ अभियान का हिस्सा बताया. संगठन का दावा है कि हसनी बलूच अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों की पहचान कराने या उनके खिलाफ कार्रवाई में मदद करता था. इसके साथ ही उसे जबरन लापता किए जाने के मामलों में भी राज्य एजेंसियों की सहायता करने का आरोप लगाया गया. यह घटना ऐसे वक्त में हुई है, जब बलूचिस्तान में लंबे विद्रोह चल रहा है और बलूचों ने खुद को आजाद घोषित कर दिया है. BLA  समेत कई बलूच समूह पाकिस्तानी राज्य और सुरक्षा बलों पर राजनीतिक दमन, लापता होने और फर्जी मुठभेड़ों का आरोप लगाते रहे हैं और उनका खुलकर विरोध करते हैं। 

पाकिस्तानी फौज के हाथ-पांव काट रहा संगठन
पाकिस्तान सरकार इन समूहों को उग्रवादी और अलगाववादी बताती है, जो सुरक्षा कर्मियों, आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमले करते हैं. BLA इस वक्त काफी मजबूत स्थिति में है और वो अब अपनी कार्रवाइयों को ज्यादा खुफिया-आधारित बता रहा है. वह उन लोगों को निशाना बनाने का दावा करता है जिन्हें वह सहयोगी या मुखबिर मानता है, ताकि पाकिस्तानी फौज की पैठ इलाके में बिल्कुल खत्म हो जाए. क्वेटा की यह गोलीबारी संघर्ष के व्यक्तिगत स्वरूप को भी दिखाती है, जहां सुरक्षा बलों और सरकारी ठिकानों के साथ-साथ संदिग्ध सहयोगियों को भी निशाना बनाया जा रहा है. संगठन ने बलूचिस्तान की पूर्ण आजादी की अपनी मांग दोहराई है और चेतावनी दी है कि राज्य की मदद करने वालों को आगे भी निशाना बनाया जा सकता है। 

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