डेली न्यूज़

ब्रिक्स सांख्यिकी प्रमुखों की बैठक में ‘परिवर्तन के प्रेरक’ के रूप में गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों पर मंथन

लखनऊ

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक का उद्घाटन 
3 अगस्त, 2026 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। इस कार्यक्रम में ब्रिक्स के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, विचारकों, नागरिक समाज संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों सहित 350 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

 "सुदृढशीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास (ब्रिक्‍स)" के व्यापक विषय के तहत निर्देशित, ब्रिक्‍स सांख्यिकी ट्रैक, भारत ने" परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी " विषय को अपनाया है, जो डेटा की गुणवत्ता, नवाचार, प्रभावी प्रसार और जन-केंद्रित सांख्यिकीय प्रणालियों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो तीव्र तकनीकी प्रगति, उच्च आवृत्ति और बारीक डेटा की बढ़ती मांग और साक्ष्य-आधारित, टिकाऊ और समावेशी विकास का समर्थन करने के लिए आधिकारिक सांख्यिकी पर बढ़ती निर्भरता के प्रति उत्तरदायी हैं। 

 राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की बैठक के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के महानिदेशक (डेटा गवर्नेंस) के परिचय के साथ हुआ, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के प्रधान सचिव श्री आलोक कुमार ने संबोधित किया।  

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव और ब्रिक्स 2026 सांख्यिकी ट्रैक के अध्यक्ष डॉ. सौरभ गर्ग ने दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिनिधियों का स्वागत किया और ब्रिक्स सांख्यिकी ट्रैक 2026 की प्रमुख प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला, जो "परिवर्तन के चालक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी" पर केंद्रित हैं। इनमें राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, प्रशासनिक डेटा और डिजिटल पब्लिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का उपयोग तथा डेटा प्रबंधन और गोपनीयता सम्‍बंधी मानकों को सुदृढ़ करना शामिल है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि तकनीकी आदान-प्रदान और साझा अनुभवों के माध्यम से, ब्रिक्स सदस्य देशों का लक्ष्य डेटा अंतराल को पाटना, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा देना और भविष्य के लिए सुदृढ़ सांख्यिकी प्रणालियों का निर्माण करना है।

उद्घाटन सत्र के दौरान, राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठनों के प्रमुखों और ब्रिक्स सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधियों ने संक्षिप्त परिचय दिया और बैठक से अपनी अपेक्षाएं साझा कीं। सहभागी देशों ने ब्रिक्स सांख्यिकी ट्रैक के तहत सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और आधिकारिक सांख्यिकी को आगे बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ज्ञान साझाकरण, सर्वोत्तम प्रणालियों के आदान-प्रदान, सांख्यिकीय पद्धतियों के सामंजस्य और सांख्यिकीय नवाचार को बढ़ावा देने के माध्यम से निरंतर सहयोग ब्रिक्स सांख्यिकीय समुदाय को सूचित नीति निर्माण के लिए साक्ष्य आधार को मजबूत करने, लचीली अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने और सतत विकास की दिशा में प्रगति को गति देने में सक्षम बनाएगा।

 बैठक के दौरान 3 अगस्त, 2026 को ब्रिक्स संयुक्त सांख्यिकी प्रकाशन (जेएसपी), 2026 का मसौदा और ब्रिक्स जेएसपी 2026 का संक्षिप्त संस्करण जारी किया गया। ब्रिक्स सदस्य देशों से प्राप्त किसी भी अतिरिक्त सुझाव या टिप्पणी को ब्रिक्स सदस्य देशों की सहमति के अधीन शामिल किया जाएगा।
 ब्रिक्स के मुख्य तकनीकी सत्र-I का शीर्षक था "डिजिटल प्लेटफॉर्म से क्रियान्वयन स्तर तक: डेटा प्रसार के लिए राष्ट्रीय पद्धतियां और रणनीतिक दृष्टिकोण"। इसमें भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे विभिन्न सदस्य देशों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों में डेटा प्रसार प्रणालियों को सुदृढ़ करने, सुलभता बढ़ाने और डिजिटल युग में आधिकारिक आंकड़ों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय अनुभवों, नवोन्मेषी दृष्टिकोणों और रणनीतिक पहलों को प्रदर्शित किया गया।

  "सांख्यिकीय प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधार" विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र-II में भारत, इथियोपिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें तेजी से विकसित हो रहे डेटा इकोसिस्‍टम के जवाब में सांख्यिकीय प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए राष्ट्रीय सुधारों, संस्थागत नवाचारों और रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।

 तकनीकी सत्रों के अतिरिक्त, 3 अगस्त, 2026 को ज्ञान साझेदार सिविकडेटा लैब के सहयोग से 'प्रशासनिक डेटा की क्षमता को उजागर करना' विषय पर एक सह-कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों, नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों और केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधिकारियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र में प्रशासनिक डेटा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जो अधिक समयोचित, संक्षिप्‍त और विस्तृत आधिकारिक आंकड़े तैयार करने के लिए एक रणनीतिक राष्ट्रीय संसाधन है, साथ ही सामंजस्यपूर्ण मेटाडेटा, अंतरसंचालनीय प्रणालियों और मजबूत संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। चर्चा का समापन सरकारों, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों, शिक्षाविदों और प्रौद्योगिकी भागीदारों के बीच मजबूत सहयोग के आह्वान के साथ हुआ, ताकि विश्वसनीय डेटा इकोसिस्‍टम का निर्माण किया जा सके और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत किया जा सके।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button