अध्यात्म

वास्तु नियम: हाथ में रोटी देना क्यों माना जाता है अशुभ, जानें कारण

वास्तु शास्त्र में भोजन को केवल शरीर का पोषण ही नहीं, बल्कि देवता (मां अन्नपूर्णा) का स्वरूप माना गया है. रसोई घर और भोजन परोसने के कई नियम वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में बताए गए हैं. इन्हीं में से एक नियम रोटी परोसने के तरीके से जुड़ा है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी को भी हाथ में सीधे रोटी देना बेहद अशुभ माना जाता है. इसे दरिद्रता, नकारात्मकता और अन्न के तिरस्कार का प्रतीक माना गया है.

हाथ में रोटी देना अशुभ क्यों है?
मां अन्नपूर्णा का अपमान
भोजन को साक्षात देवी अन्नपूर्णा का रूप माना जाता है. रोटी सीधे हाथ में थमा देना अन्न का अपमान माना जाता है, जिससे घर की बरकत खत्म हो सकती है.

दरिद्रता का वास
ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति किसी के हाथ में सीधे रोटी देता है, उसके घर से धन की देवी मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं और आर्थिक तंगी (वास्तु दोष) उत्पन्न होने लगती है.

भिक्षा के समान
पुराने समय में केवल भिक्षुकों या संन्यासियों को ही हाथ में अन्न या भिक्षा देने का विधान था. परिवार के सदस्यों या मेहमानों को हाथ में रोटी देना उन्हें भिक्षुक मानने के समान है.

नकारात्मक ऊर्जा का संचार
वास्तु के अनुसार, हाथ से हाथ में सीधे अन्न देने से देने वाले और लेने वाले के बीच नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे घर के सदस्यों के बीच क्लेश और मनमुटाव बढ़ता है.

शोक का प्रतीक
कई लोक मान्यताओं में, मृत्यु भोज या किसी बड़े शोक के समय ही बिना बर्तन के भोजन दिया जाता है. इसलिए सामान्य दिनों में ऐसा करना किसी अपशकुन को न्योता देने जैसा माना गया है.

वास्तु के अनुसार रोटी परोसने के सही नियम
थाली का उपयोग
रोटी हमेशा सम्मान के साथ भोजन करने वाले की थाली (प्लेट) में ही रखनी चाहिए.

बर्तन या टोकरी से परोसें
यदि किसी को अतिरिक्त रोटी चाहिए, तो उसे सीधे हाथ में देने के बजाय रोटी के बर्तन (कैसरोल व टोकरी) में लेकर जाएं और चिमटे से उनकी थाली में रखें.

रोटियों की संख्या
वास्तु में किसी की थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना अशुभ माना जाता है. हमेशा एक, दो या चार के क्रम में ही रोटियां परोसें.

स्वच्छता और शांत मन
भोजन हमेशा साफ हाथों, प्रसन्न मुद्रा और शांत मन से परोसना चाहिए. क्रोध में परोसा गया भोजन शरीर को नहीं लगता है.

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