अध्यात्म

वास्तु नियम: रोटी परोसते समय इन बातों का रखें ध्यान, बढ़ेगी बरकत

 वास्तु शास्त्र में रसोई घर (Kitchen) और भोजन करने के तरीकों को लेकर कई महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं. ऐसा माना जाता है कि रसोई में मां अन्नपूर्णा का वास होता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, भोजन परोसने का तरीका घर की आर्थिक स्थिति, सुख-समृद्धि और सदस्यों के आपसी संबंधों को सीधे प्रभावित करता है. रोटी परोसते समय वास्तु शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

1. थाली में कभी न परोसें तीन रोटियां
वास्तु और हिंदू संस्कृति में थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना बेहद अशुभ माना जाता है. दरअसल, 3 नंबर को पूजा-पाठ या शुभ कार्यों में वर्जित माना जाता है. इसके अलावा, पारंपरिक रूप से मृतक के श्राद्ध या त्रयोदशी संस्कार के समय ही थाली में तीन रोटियां रखी जाती हैं. ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी कलह या मानसिक तनाव हो सकता है. यदि किसी को तीन रोटियां खानी भी हैं, तो पहले दो परोसें, उसके बाद एक और दे सकते हैं.

2. हाथ में लेकर न दें रोटी
अक्सर लोग जल्दबाजी में तवे से रोटी उतारकर सीधे हाथ में लेकर किसी को दे देते हैं. वास्तु के अनुसार यह बहुत बड़ी गलती है.

नियम: रोटी हमेशा किसी प्लेट, थाली या केंटर (रोटी रखने के बर्तन) में रखकर ही सम्मानपूर्वक परोसनी चाहिए.

प्रभाव: हाथ में रोटी देना दरिद्रता को आमंत्रण देने जैसा माना जाता है. इससे घर की बरकत चली जाती है और कमाया हुआ धन व्यर्थ के कामों में खर्च होने लगता है.

3. मेहमान को या खाने वाले को बैठकर ही परोसें
खाना खाने वाले व्यक्ति का आसन सही होना जरूरी है, साथ ही परोसने वाले को भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.

दिशा का महत्व: भोजन करने वाले का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करना पितरों का मार्ग माना जाता है, जो सामान्य परिस्थितियों में वर्जित है.

परोसने का तरीका: हमेशा आदर और शांत मन से भोजन परोसें. गुस्से या चिड़चिड़ेपन में परोसा गया भोजन खाने वाले के शरीर और मन पर नकारात्मक असर डालता है.

4. बासी आटे की रोटी न बनाएं
आजकल फ्रिज में गूंथा हुआ आटा रखकर अगले दिन उसकी रोटियां बनाना आम बात हो गई है, लेकिन वास्तु और स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से यह गलत है.

प्रभाव: वास्तु शास्त्र के अनुसार, बासी आटे का संबंध राहु और केतु से होता है. ऐसे आटे की रोटी घर में बीमारी, आलस्य और नकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है. हमेशा ताजा आटा गूंथकर ही रोटियां बनानी चाहिए.

5. पहली और आखिरी रोटी का नियम
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, किचन में रोटियां बनाते समय पहली और आखिरी रोटी का एक विशेष नियम होता है.

पहली रोटी (गौ ग्रास): तवे पर बनने वाली पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए. इससे घर के सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है.

आखिरी रोटी: सबसे आखिरी में बनने वाली रोटी कुत्ते या किसी अन्य जानवर के लिए निकालनी चाहिए. इससे राहु-केतु और शनि शांत रहते हैं.

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