Home अध्यात्म माता सीता की अग्निपरीक्षा का सच,माया सीता की कथा और रहस्य

माता सीता की अग्निपरीक्षा का सच,माया सीता की कथा और रहस्य

23
0

माता सीता जब लंका से वापस आईं थी तब माता सीता ने अग्निपरीक्षा देनी पड़ थी। लेकिन, क्या आप जानते हैं माता सीता की इस अग्नि परीक्षा के पीछे एक बड़ा रहस्य है। रामायण कथा सिर्फ एक भाषा में नहीं बल्कि कई भाषाओं में है। अलग अलग रामायण में बताया गया है कि मां सीता एक नहीं बल्कि दो थी और माता सीता के इन दोनों स्वरुपों के बारे में भगवान राम जानते थे। आइए जानते हैं माता सीता की अग्नि परीक्षा का सच और माता सीता के दोनों स्वरुपों की कथा।

क्या दो माता सीता थी ?
रामायण की पौराणिक कथाओं के अनुसार, रामायण में एक नहीं बल्कि दो सीता थीं। एक माता सीता और दूसरी उनकी छाया। जब लक्ष्मण जी कंदमूल फल लेने के लिए वन में चले गए थे। तब भगवान राम ने माता सीते से कहा कि अब लीला करने वाला हूं और में राक्षसों का वध करुंगा। भगवान राम पहले की जानते थे कि रावण माता सीता का हरण करने वाला है। इसिलए उन्होंने अग्निदेव से माता सीता की सुरक्षा के लिए कहा। तब अग्निदेव के पास असली सीता गई और माता सीता की छाया वहीं रुक गई। माता सीता अग्निदेव की पूजा करती थी। इसलिए अग्निदेव उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे। पूरे वनवास के दौरान माता सीता ही भगवान राम के साथ रही थी। जब रावण माता सीता को लेकर गया तो वह असली माता सीता को नहीं बल्कि माया सीता को लेकर गया था।

क्यों की गई थी माता सीता का अग्नि परीक्षा
जब भगवान राम ने रावण का वध किया उसके बाद जब अयोध्या वापस आना के समय हुआ तो माता सीता का अग्नि परीक्षा का बात कही गई। लक्ष्मजी ने इसका बहुत विरोध किया। लेकिन, भगवान राम सच जानते थे इसलिए माता सीता की अग्नि परीक्षा की गई। अग्निपरीक्षा एक दिव्य लीला थी। जैसे ही माता सीता अग्नि में प3वेश करती हैं वैसे ही माया सीता अग्नि में विलीन हो जाती है और अग्नि से जो बाहर प्रकट होती हैं वह असली माता सीता है। इसलिए ही माता सीता की अग्नि परीक्षा की गई थी ताकि माया सीता अग्नि में समा जाएं और आसली माता सीता वापस प्रभु राम के साथ अयोध्या लौंट जाएं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here