बेंगलुरु
ओमान तट के पास एक भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हुए मिसाइल हमले को लेकर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है. विदेश मंत्रालय ने इस घटना को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सिविलियन नाविकों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम भले ही फिलहाल लागू हो, लेकिन दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि ओमान तट के पास भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हुआ हमला अस्वीकार्य है. हम इस बात की निंदा करते हैं कि लगातार कमर्शियल शिपिंग और नागरिक नाविकों को निशाना बनाया जा रहा है. मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि जहाज पर मौजूद सभी भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं. भारत ने बचाव अभियान चलाने के लिए ओमान प्रशासन का धन्यवाद भी किया. बयान में कहा गया कि भारत दोहराता है कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक क्रू मेंबर्स की जान खतरे में डालना और समुद्री व्यापार व नेविगेशन की स्वतंत्रता में बाधा डालने जैसी घटनाओं से बचा जाना चाहिए. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इससे पहले भी भारतीय हजार पर हमले हुए हैं।
किसने किया हमला? अभी साफ नहीं
हालांकि भारत सरकार ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि जहाज पर हमला किसने किया. लेकिन यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका टकराव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण इस इलाके में वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतें इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं. ऐसे में यहां किसी भी तरह का हमला या अस्थिरता सीधे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है. जानकारों का कहना है कि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर खतरा तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि भारत ने इस हमले को केवल एक सुरक्षा घटना नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
भारत की बढ़ी चिंता
भारत लंबे समय से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की वकालत करता रहा है. भारतीय जहाज पर हुए इस हमले के बाद यह साफ हो गया है कि पश्चिम एशिया का तनाव अब सीधे भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को भी प्रभावित करने लगा है. हालांकि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ा, तो उसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कितना गंभीर हो सकता है।







