मालदीव से भारतीय सैनिक वापस बुलाने मामले में नेवी चीफ आर. हरि कुमार ने कहा अभी आदेश नहीं आया 

मालदीव 
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू कई बार कह चुके हैं कि भारत की सेना को उनके देश से वापस चले जाना चाहिए। इस बारे में पिछले दिनों खबर थी कि भारत सरकार भी इस पर विचार कर रही है। लेकिन गुरुवार को नेवी चीफ आर. हरि कुमार के बयान से अलग ही स्थिति पता चल रही है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने सैनिकों को यह आदेश नहीं दिया है कि वे मालदीव से वापस लौट आएं। मालदीव से सैनिकों की वापसी को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा चल रही है। जानकारी के अनुसार मालदीव में भारत के 88 सैनिक तैनात हैं। इसके अलावा भारतीय सेनाओं से ही जुड़े 12 मेडिकल कर्मी भी वहां तैनात हैं।

भारत की ओर से मालदीव को दो हेलिकॉप्टर और एक डॉर्नियर एयरक्राफ्ट भी दिया गया है, जिसका इस्तेमाल मुख्य तौर पर समुद्री क्षेत्रों में सर्विलांस के लिए किया जाता है। इसके अलावा सर्च, रेस्क्यू और मेडिकल ऑपरेशनों में भी ये इस्तेमाल किए जाते हैं। पिछले दिनों भारत और मालदीव के कोर ग्रुप की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में मालदीव की ओर से अली नसीर और भारत की तरफ से वहां उच्चायुक्त के तौर पर तैनात मुनु महावर की बातचीत हुई थी। इस मीटिंग में तय हुआ था कि भारत अपने सैनिकों को 15 मार्च तक वापस बुला लेगा।

वहीं अब आर. हरि कुमार ने कहा है कि हम सरकार के फैसले को मानेंगे। फिलहाल हमें कोई आदेश नहीं दिया गया है कि सैनिकों की वापसी कब होगी। मालदीव के नए बने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने चुनाव ही भारत के खिलाफ कैंपेन करते हुए लड़ा था। सत्ता में आते ही उन्होंने भारत से अपने सैनिकों को वापस बुलाने को कहा था। इसके अलावा वह चीन का दौरा भी कर आए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वह भारत की बजाय चीन की ओर झुकाव रखना चाहते हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा था कि वह सैनिकों को बुला ले। मुइज्जू का कहना था कि मालदीव के लोगों ने उन्हें इसके लिए बड़ा जनाधार दिया है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मोहम्मद मुइज्जू चीन के दौरे पर गए थे। इस दौरान चीन के साथ कई समझौते भी किए हैं। यही नहीं वापस लौटने पर उन्होंने कहा था कि यदि हम छोटे देश हैं तो किसी को लाइसेंस नहीं मिल जाता कि वह हमें धमकी दे। हालांकि मुइज्जू के खिलाफ वहां का विपक्ष स्वर बुलंद कर रहा है और भारत से रिश्ते बिगाड़ने पर लानत भी दे रहा है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि भारत से दोस्ती बेहतर रखना मालदीव के हितों के लिए जरूरी है। खासतौर पर मालदीव की अर्थव्यवस्था के लिए यह बेहतर होगा।