उत्तर प्रदेश

कानपुर हिंसा मामले में2 थानेदार सस्पेंड, 1 लाइनहाजिर

कानपुर
 उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून को हुए उपद्रव को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। नूपुर शर्मा के बयान के बाद कानपुर में जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के करीब एक महीने के बाद 3 थानेदारों पर कार्रवाई हुई है। इसमें से 2 थानेदार सस्पेंड हुए हैं, जबकि एक लाइनहाजिर किए गए हैं।

 

प्रभारी निरीक्षक बेकनगंज नवाब अहमद और प्रभारी निरीक्षक बजरिया संतोष कुमार सिंह निलंबित कर दिए गए हैं। वहीं प्रभारी निरीक्षक चमनगंज जैनेन्द्र सिंह लाइन हाजिर हुए। अजय कुमार सिंह को बेकनगंज, विक्रम सिंह को बजरिया और जावेद अहमद को चमनगंज भेजा गया। पुलिस ने मास्टर माइंड हयात जफर और उसके साथी जावेद अहमद खान, मो सूफियान और मोहम्मद राहिल को जेल भेजा था।

कानपुर में 3 जून को प्रदर्शनकारी नूपुर शर्मा के बयान के विरोध में बाजार बंद करा रहे थे। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। इसी बीच भीड़ उग्र हो गई और पथराव और आगजनी शुरू हो गई। पुलिस पर भी पथराव हुआ था। बाद में हिंसा के मास्‍टरमाइंड हयात जफर हाशमी को अरेस्‍ट कर लिया गया। कानपुर हिंसा में 58 उपद्रवियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

कानपुर में हुईं हिंसा के बाद अब प्रशासन सख्त रुख अपना चुका है। प्रशासन के आदेश पर कानपुर में मुख्तार बाबा की सभी दुकानों को सील कर दिया गया है। कानपुर हिंसा के आरोपी जफर हयात हाशमी के साथ कनेक्शन होने के मामले में मुख्तार बाबा पर प्रशासनिक कार्रवाई जारी है। वहीं खाद्य विभाग की टीम ने उनकी दुकान से लिए सैंपल्स की जांच के बाद इन्हें फेल कर दिया है। अब इस संबंध में प्रशासन ने सभी दुकानों को सील किया है।

कानपुर में बीते तीन जून शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद भीड़ इकट्ठा होकर जुलूस के रूप में नई सड़क की तरफ निकल पड़ी थी। इसी दौरान आरोपी अजीम हाथ में कलावा बांधकर चंद्रेश्वर हाता के बाहर खड़ा हो गया था। ताकि हाते के लोग समझे कि हमारी तरफ से है। अजीम ने जैसे ही रुमाल से इशारा किया, उपद्रवियों की भीड़ चंद्रेश्वर हाते पर टूट पड़ी। हाते में घुसकर पत्थरबाजी, लाठी-डंडों से लोगों की पिटाई की थी।

अजीम शुक्ला नाम से जाना जाता है आरोपी
कानपुर हिंसा का आरोपी अजीम एक अधिवक्ता के यहां मुंशी का काम करता है। लंबे अर्से से काम करने की वजह से सभी लोग उसे शुक्ला के नाम से पुकारने लगे थे। अजीम खुद भी अपने आप को अजीम शुक्ला बताता था। अजीम हाथ में कलावा बांधत था। लेकिन कभी-कभी माथे पर तिलक भी लगाता था। एसआईटी ने अजीम से पूछताछ की तो पता चला कि वह मुख्तार बाबा का करीबी है। बिल्डर हाजी वसी, बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट के मालिक मुख्तार बाबा समेत अधिकतर आरोपी हाता को खाली कराना चाहते थे।

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