उत्तर प्रदेश

हारे बूथ जीतने को बीजेपी ने उतारी कार्यकर्ताओं की फौज, 40 बिंदुओं पर करवाएगी सर्वे

लखनऊ
 लोकसभा चुनाव 2024 में होने हैं लेकिन भाजपा पूरी शिद्दत से अभी से तैयारी में जुटी है। रामपुर और आजमगढ़ सीटें जीतने के बाद पार्टी के हौसले और बुलंद हैं। भगवा खेमे ने 2019 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों के तहत करीब 30 हजार बूथों को मजबूत करने को 6 हजार लोगों की फौज मैदान में उतार दी है।

प्रदेश में 1 लाख 74 हजार पोलिंग बूथ हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो भाजपा इनमें से करीब 1 लाख 23 हजार बूथों पर जीती थी। तब पार्टी को 51 फीसदी वोट मिले थे। यह तब था जब यूपी में सपा और बसपा गठबंधन में रहकर चुनाव लड़े थे। राष्ट्रीय लोकदल भी उनके साथ था। भाजपा 2014 से लगातार प्रदेश में अपना प्रदर्शन सुधार रही है। इस सिलसिले को वर्ष 2024 में भी बरकरार रखने की कवायद हो रही है।

लड़ाई वाले बूथों पर फोकस : प्रदेश में करीब एक लाख पोलिंग बूथ ऐसे हैं जो भाजपा की दृष्टि से बेहद मुफीद हैं। पिछले कई चुनावों से इन बूथों पर भगवा ही लहरा रहा है। ऐसे में पार्टी का फोकस अब उन 30-35 हजार पोलिंग बूथों पर है जहां भाजपा लड़ाई में रहती है। कभी जीत मिलती है तो कभी हार। इन बूथों को मजबूत करने की रणनीति के तहत क्षेत्र में 200 से 250 बूथों को चिन्हित किया गया है। सांसद-विधायकों सहित हर सीट पर करीब 80 लोगों की टीम लगाई गई है जबकि करीब 35 हजार बूथ ऐसे हैं जो किसी जाति विशेष, दल विशेष के प्रभाव वाले हैं।

पार्टी 40 बिंदुओं पर करा रही सर्वेक्षण
सभी 80 लोकसभा सीटों पर चिन्हित कमजोर बूथों पर पार्टी ने सर्वेक्षण शुरू कराया है। इसके लिए 40 सवालों की सूची तैयार की गई है। इन्हीं 40 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जा रही है। मसलन, उस बूथ का सामाजिक समीकरण क्या है? वहां भाजपा और विपक्ष के प्रभावशाली नेता कौन-कौन हैं। सामाजिक रूप से प्रमुख चेहरे कौन से हैं। जिन लोगों ने पहले वोट नहीं दिया, उनकी नाराजगी का क्या कारण था। पहले भाजपा की हार के क्या कारण रहे। जीतने के लिए क्या करना होगा।

 

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